जब परमेश्वर हमारे जीवन में सामर्थ्यपूर्वक कार्य करता है, तो हमें उन कार्यों को स्थिर करना चाहिए जिन्हें वह हमारे भीतर, हमारे लिए और हमारे द्वारा करता है। हमें उन्हें अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए, ताकि हम उनमें बने रहें और वहीं से आगे निर्माण करें। हम नहीं चाहते कि परमेश्वर द्वारा किया गया अच्छा कार्य व्यर्थ हो जाए और केवल हमारी स्मृति का हिस्सा बनकर रह जाए—ऐसी घटना के रूप में जो कभी हुई थी, लेकिन अब हमारे जीवन पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
परमेश्वर जो भी सामर्थ्यपूर्ण कार्य करता है, जो भी आशीष उंडेलता है, हर अनुभव, हर प्रकाशना और हर अंतर्दृष्टि, उसे परमेश्वर में हमारी आगे की यात्रा का एक और निर्माण-खंड बनना चाहिए और हमें परमेश्वर में और ऊँचे स्तरों तक ले जाना चाहिए।
दाऊद के जीवन के इस चरण से मिलनेवाली सात मुख्य शिक्षाएँ हमें सिखाती हैं कि परमेश्वर जो कार्य कर रहा है, उसे कैसे स्थिर करें और उसमें कैसे विस्तार करें: (1) प्रभु को घर बनाने दें। (2) सुनते रहें और आज्ञा मानते रहें। (3) प्रभु के प्रति अपने प्रेम को प्राथमिकता दें—निरंतर आराधना स्थापित करें। (4) परमेश्वर की वाचा के अधीन चलें। (5) बड़ी विजय मिलकर कार्य करने से प्राप्त होती है। (6) सुदृढ़ संगठन और प्रशासन स्थापित करें। (7) दयालुता दिखाएँ।
इस उपदेश में इस सामर्थ्यशाली, प्रेरणादायक और व्याख्यात्मक शिक्षा की निःशुल्क ऑडियो (MP3) और वीडियो सामग्री, प्रिंट करने योग्य PDF उपदेश की रूपरेखाएँ, उपदेश के नोट्स, चर्चा के प्रश्नों सहित छोटे समूह के अध्ययन के लिए मार्गदर्शिका और प्रस्तुति स्लाइड शामिल हैं। सभी संसाधन (उपदेश की PDF, उपदेश की MP3, उपदेश का वीडियो और उपदेश की प्रस्तुति) व्यक्तिगत अध्ययन, छोटे समूहों, बाइबल अध्ययन प्रार्थना समूहों, स्थानीय कलीसियाओं, सम्मेलनों, बाइबल कॉलेजों आदि में उपयोग के लिए निःशुल्क उपलब्ध हैं।
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