बदलाव

हमारा मसीही जीवन पश्चात्ताप से आरम्भ हुआ था, जिसका अर्थ है कि पाप और शैतान की ओर से हमने अपने मन और ह्रदय को हटाकर जीवित परमेश्वर की ओर लगाया है। मसीह में हमारे जीवन का आरम्भ परिवर्तन के एक क्षण से हुआ और उसका अंत परिवर्तन की दूसरी तात्कालिक घटना से हुआ। परंतु, इन दो बिन्दुओं के बीच परिवर्तन की एक निरंतर प्रक्रिया है। यह पुस्तक मुख्य रूप से हमें प्रेरित करता है कि हम परिवर्तन की इस निरंतर प्रक्रिया में सक्रिय रूप से सहभागी हों।